प्रोस्टेट कैंसर क्या है?
प्रोस्टेट कैंसर एक प्रकार का कैंसर है जो प्रोस्टेट ग्रंथि में होता है। यह पुरुषों में अखरोट के आकार की एक छोटी ग्रंथि है, जो वीर्य द्रव बनाती है; यह द्रव शुक्राणुओं को पोषण देता है और उन्हें आगे ले जाता है। प्रोस्टेट कैंसर आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ता है और शुरुआत में प्रोस्टेट ग्रंथि तक ही सीमित रहता है, जहाँ वह गंभीर नुकसान नहीं भी कर सकता। लेकिन कुछ प्रकार के प्रोस्टेट कैंसर तेज़ी से बढ़ और फैल सकते हैं।
प्रोस्टेट कैंसर के लक्षणों में पेशाब करने में कठिनाई, पेशाब या वीर्य में खून, इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ED), कूल्हों, पीठ या छाती में दर्द, और पैरों या पंजों में कमज़ोरी या सुन्नपन हो सकते हैं।
प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के विकल्प कैंसर की स्टेज, उसके कितना आक्रामक होने और मरीज़ की समग्र सेहत पर निर्भर करते हैं। विकल्पों में एक्टिव सर्विलांस (नियमित निगरानी), सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, हार्मोन थेरेपी, कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, या इनमें से कई तरीकों का मिला-जुला इलाज शामिल हो सकता है।
प्रोस्टेट कैंसर के प्रकार
प्रोस्टेट कैंसर के कई प्रकार होते हैं, जिन्हें मुख्य रूप से कैंसर कोशिकाओं के रूप और व्यवहार के आधार पर बाँटा जाता है।
एडेनोकार्सिनोमा: यह उप-प्रकार 90% से अधिक मामलों में होता है और प्रोस्टेट ग्रंथि की ग्रंथि वाली कोशिकाओं से शुरू होता है। यह आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ता है।
स्मॉल सेल कार्सिनोमा: प्रोस्टेट कैंसर का यह दुर्लभ और आक्रामक रूप आमतौर पर तेज़ी से बढ़ता है, इसलिए इसका इलाज चुनौतीपूर्ण होता है।
डक्टल एडेनोकार्सिनोमा: यह एडेनोकार्सिनोमा से कम पाया जाता है। यह प्रोस्टेट ग्रंथि की नलिकाओं से शुरू होता है और इसकी विशेषताएँ अलग हो सकती हैं।
जोखिम कारक
कई कारक प्रोस्टेट कैंसर होने का जोखिम बढ़ा सकते हैं:
- उम्र: प्रोस्टेट कैंसर का सबसे बड़ा जोखिम कारक उम्र है। 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में युवा पुरुषों की तुलना में प्रोस्टेट कैंसर होने की संभावना कहीं अधिक होती है।
- नस्ल: अफ्रीकी-अमेरिकी पुरुषों में अन्य नस्लों के पुरुषों की तुलना में प्रोस्टेट कैंसर होने और उससे मृत्यु होने की संभावना अधिक होती है।
- पारिवारिक इतिहास: यदि आपके पिता, भाई या बेटे को प्रोस्टेट कैंसर हुआ है, तो आपमें इस रोग का जोखिम बढ़ जाता है।
- मोटापा: मोटापे से अधिक आक्रामक प्रोस्टेट कैंसर होने का जोखिम बढ़ सकता है।
यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि किसी जोखिम कारक का होना यह नहीं बताता कि आपको प्रोस्टेट कैंसर ज़रूर होगा। जोखिम कारक वाले कई पुरुषों को यह रोग कभी नहीं होता।
प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण और जाँच
- बार-बार पेशाब आना, खासकर रात में (नॉक्टूरिया)
- पेशाब शुरू करने में कठिनाई
- पेशाब की धार कमज़ोर होना
- पेशाब की अचानक तेज़ तलब (अर्जेंसी)
- पेशाब का रिसाव (इन्कॉन्टिनेंस)
- वीर्य में खून (हीमैटोस्पर्मिया)
- पीठ के निचले हिस्से, कूल्हों, जाँघों या ऊपरी जाँघों में दर्द
- भूख और वज़न में कमी
- इरेक्टाइल डिसफंक्शन
- वीर्यपात के समय दर्द
प्रोस्टेट कैंसर का पक्के तौर पर पता लगाने वाली कोई एक जाँच नहीं है। लेकिन कई जाँचें हैं जो इस रोग का पता लगाने में मदद करती हैं। इन जाँचों में शामिल हैं:
- डिजिटल रेक्टल एग्ज़ाम (DRE): DRE में डॉक्टर दस्ताना पहनी, चिकनाई लगी उँगली आपके गुदा (रेक्टम) में डालकर प्रोस्टेट ग्रंथि को महसूस करते हैं। डॉक्टर प्रोस्टेट के आकार, आकृति या बनावट में किसी असामान्यता की जाँच करते हैं।
- प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन (PSA) ब्लड टेस्ट: PSA टेस्ट आपके खून में PSA का स्तर मापता है। PSA प्रोस्टेट ग्रंथि द्वारा बनाया जाने वाला एक प्रोटीन है। PSA का ऊँचा स्तर प्रोस्टेट कैंसर का संकेत हो सकता है, लेकिन यह BPH या प्रोस्टेट की सूजन (प्रोस्टेटाइटिस) जैसी अन्य स्थितियों से भी हो सकता है।
- प्रोस्टेट बायोप्सी: प्रोस्टेट बायोप्सी एक प्रक्रिया है जिसमें प्रोस्टेट ग्रंथि से ऊतक का एक छोटा नमूना निकाला जाता है और कैंसर कोशिकाओं को देखने के लिए माइक्रोस्कोप से जाँचा जाता है।
- इमेजिंग जाँचें: MRI स्कैन या CT स्कैन जैसी इमेजिंग जाँचों से प्रोस्टेट ग्रंथि को बेहतर ढंग से देखा जाता है और यह पता लगाया जाता है कि कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों में फैला है या नहीं।
प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के लिए डॉ. आदित्य पी.एस. सेंगर को क्यों चुनें
डॉ. आदित्य पी.एस. सेंगर प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में विशेषज्ञता रखने वाले जाने-माने यूरोलॉजिस्ट हैं। उनके इलाज में उन्नत चिकित्सा तकनीकों और व्यक्तिगत देखभाल का मेल है। यहाँ प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के कुछ आम तरीके दिए गए हैं। कई कारणों से डॉ. आदित्य पी.एस. सेंगर प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के लिए एक पसंदीदा विकल्प हैं।
डॉ. आदित्य पी.एस. सेंगर द्वारा प्रोस्टेट कैंसर का इलाज
प्रोस्टेट कैंसर का इलाज कैंसर की स्टेज और ग्रेड के साथ-साथ मरीज़ की समग्र सेहत पर निर्भर करता है। इलाज के आम विकल्पों में शामिल हैं:
रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी
यह पूरी प्रोस्टेट ग्रंथि को निकालने की सर्जरी है।
लैप्रोस्कोपिक रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी
यह कम चीरे वाली (मिनिमली इन्वेसिव) सर्जरी है, जिसमें पेट पर छोटे चीरों से प्रोस्टेट ग्रंथि निकाली जाती है।
रोबोट-असिस्टेड लैप्रोस्कोपिक प्रोस्टेटेक्टॉमी
यह लैप्रोस्कोपिक रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी का एक प्रकार है, जिसमें सर्जन की सहायता के लिए रोबोटिक आर्म्स का उपयोग होता है।
कृपया ध्यान दें
प्रोस्टेट कैंसर का जल्दी पता लगना और इलाज शुरू होना सफल नतीजे की संभावना बढ़ाने के लिए ज़रूरी है। निगरानी की रणनीतियों में अक्सर समय-समय पर सिस्टोस्कोपी, इमेजिंग जाँचें और पेशाब की जाँचें शामिल होती हैं, ताकि कैंसर के दोबारा लौटने के संकेतों पर नज़र रखी जा सके। प्रोस्टेट कैंसर का पूर्वानुमान (प्रॉग्नॉसिस) कई कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें कैंसर की स्टेज और ग्रेड तथा मरीज़ की समग्र सेहत शामिल हैं।
प्रोस्टेट कैंसर की जाँच
ये जाँचें डॉक्टर को प्रोस्टेट कैंसर की पुष्टि करने और यह पता लगाने में मदद करती हैं कि कैंसर कितना फैला है।
- PSA ब्लड टेस्ट: प्रोस्टेट द्वारा बनाए जाने वाले एक प्रोटीन को मापता है। इसका ऊँचा स्तर कई कारणों से हो सकता है, सिर्फ़ कैंसर से नहीं।
- डिजिटल रेक्टल एग्ज़ाम (DRE): डॉक्टर दस्ताना पहनी उँगली से प्रोस्टेट को हल्के से महसूस करते हैं।
- प्रोस्टेट का MRI: प्रोस्टेट में कोई भी संदिग्ध दिखने वाला हिस्सा दिखाता है।
- प्रोस्टेट बायोप्सी: प्रोस्टेट के छोटे टुकड़े लेकर माइक्रोस्कोप से जाँचे जाते हैं। कैंसर की पुष्टि करने का यही एकमात्र तरीका है।
- बोन स्कैन, CT या PSMA PET स्कैन: यह जाँचने के लिए किए जा सकते हैं कि कैंसर फैला है या नहीं।
प्रोस्टेट कैंसर का इलाज कैसे किया जाता है
- डॉक्टर बायोप्सी रिपोर्ट, कैंसर की स्टेज और आपकी सामान्य सेहत देखते हैं, और आपके तथा आपके परिवार के साथ विकल्पों पर चर्चा करते हैं।
- कुछ धीरे बढ़ने वाले कैंसर में सिर्फ़ एक्टिव सर्विलांस की ज़रूरत हो सकती है, यानी नियमित PSA जाँच, स्कैन और कभी-कभी दोबारा बायोप्सी।
- प्रोस्टेट तक सीमित कैंसर में विकल्पों में प्रोस्टेट निकालने की सर्जरी (रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी) या रेडिएशन थेरेपी शामिल हो सकती है।
- जो कैंसर फैल चुका हो, उसमें अक्सर हार्मोन थेरेपी दी जाती है, कभी-कभी कीमोथेरेपी जैसी अन्य दवाओं के साथ।
- आपके इलाज की योजना में इनमें से एक से ज़्यादा तरीके शामिल हो सकते हैं, जो आपके मामले पर निर्भर करेगा।
- इलाज के बाद कैंसर के दोबारा लौटने की जाँच के लिए नियमित रूप से PSA टेस्ट किए जाते हैं।
प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के बाद रिकवरी
- सर्जरी के बाद पहले 24-48 घंटेआपको जल्दी चलने में मदद की जाती है। यूरिन कैथेटर लगा रहता है।
- 1-2 सप्ताहज़्यादातर लोग कुछ दिनों में घर चले जाते हैं। कैथेटर आमतौर पर लगभग एक से दो सप्ताह में निकाल दिया जाता है।
- पहले कुछ महीनेशुरुआत में पेशाब का थोड़ा रिसाव या इरेक्शन में बदलाव आम हैं, और अक्सर समय के साथ तथा पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़ से बेहतर हो जाते हैं।
- लंबे समय तकनियमित PSA जाँच ज़रूरी है, आमतौर पर शुरू में हर कुछ महीनों में और फिर कम बार।
रिकवरी चुने गए इलाज पर निर्भर करती है, इसलिए डॉक्टर आपके मामले के लिए योजना देंगे।
लखनऊ में प्रोस्टेट कैंसर के इलाज का खर्च
प्रोस्टेट कैंसर के इलाज का खर्च कैंसर की स्टेज, ज़रूरी जाँचों और स्कैन, तथा चुने गए इलाज पर निर्भर करता है, जैसे निगरानी, सर्जरी, रेडिएशन या हार्मोन थेरेपी। कुछ मरीज़ों को सिर्फ़ नियमित जाँच की ज़रूरत होती है, जबकि कुछ को सर्जरी और अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत पड़ती है।
प्रिसिजन यूरोलॉजी हॉस्पिटल लगभग सभी स्वास्थ्य बीमा और कैशलेस योजनाएँ स्वीकार करता है, इसलिए ज़्यादातर कैंसर के इलाज कवर हो जाते हैं। इलाज शुरू होने से पहले आपको साफ़ अनुमान (एस्टिमेट) दिया जाएगा, ताकि आपका परिवार बिना किसी अचानक खर्च के योजना बना सके। निःशुल्क पहली राय के लिए आप अपनी रिपोर्ट WhatsApp पर भेज सकते हैं। कवरेज आपकी अपनी पॉलिसी पर निर्भर करता है, और टीम इलाज से पहले आपके बीमाकर्ता से इसकी जाँच कर सकती है।
मुफ़्त राय के लिए रिपोर्ट भेजेंप्रोस्टेट कैंसर के लिए डॉ. आदित्य पी.एस. सेंगर से क्यों मिलें
- यूरो-ऑन्कोलॉजी सर्जन, यूरोलॉजी विभाग के वाइस-चेयरमैन
- जहाँ उचित हो, दूरबीन (लैप्रोस्कोपिक) से कैंसर की सर्जरी
- पूरी रिपोर्ट देखकर इलाज की योजना, सरल भाषा में समझाई जाती है
देखें: डॉ. आदित्य पी.एस. सेंगर समझाते हैं
प्रोस्टेट कैंसर: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या PSA ज़्यादा आने का मतलब हमेशा प्रोस्टेट कैंसर होता है?
नहीं। PSA संक्रमण, प्रोस्टेट बढ़ने, हाल की किसी प्रक्रिया या कैंसर की वजह से बढ़ सकता है। यूरोलॉजिस्ट PSA को जाँच और इमेजिंग के साथ मिलाकर समझते हैं।
प्रोस्टेट कैंसर की पुष्टि किस जाँच से होती है?
प्रोस्टेट बायोप्सी से कैंसर की पुष्टि होती है और इलाज की योजना के लिए ज़रूरी ग्रेड की जानकारी मिलती है।
क्या प्रोस्टेट कैंसर का तुरंत इलाज करने की जगह उस पर नज़र रखी जा सकती है?
कुछ कम जोखिम वाले कैंसर में एक्टिव सर्विलांस (नियमित निगरानी) उचित हो सकती है, लेकिन यह बायोप्सी, PSA, इमेजिंग और मरीज़ की स्थिति पर निर्भर करता है।
प्रोस्टेट की सर्जरी पर कब विचार किया जाता है?
चुने हुए, प्रोस्टेट तक सीमित (लोकलाइज़्ड) प्रोस्टेट कैंसर में स्टेज, ग्रेड, सेहत और इलाज के लक्ष्य के आधार पर सर्जरी पर विचार किया जा सकता है।
प्रोस्टेट कैंसर के लिए परामर्श बुक करें
Precision Urology Hospital में OPD सोमवार से शनिवार, दोपहर 12:00 से शाम 6:00 बजे। WhatsApp पर बुक करें, टीम आपका समय पक्का कर देगी।
मुफ़्त राय के लिए WhatsApp पर अपनी रिपोर्ट भेजेंPrecision Urology Hospital, 652B/37 Pratap Nagar, Tedhi Pulia Ring Road, Lucknow 226022। रास्ता देखें
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